ईर्ष्या

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एक बार की बात है रेगिस्तान में एक आदमी को यमदूत मिला जो बहुत प्यासा था, लेकिन आदमी उसे पहचान नहीं सका और उसने यमदूत को पानी पिलाया. तब यमदूत बोला:
“मैं मृत्युलोक से तुम्हारे प्राण लेने आया हूँ” – “लेकिन तुम अच्छे आदमी लगते हो इसलिए मैं तुम्हें पांच मिनट के लिए नियति की पुस्तक दे सकता हूँ. इतने समय में तुम जो कुछ बदलना चाहो, बदल सकते हो”.
यमदूत ने उसे नियति की पुस्तक दे दी. पुस्तक के पन्ने पलटते हुए आदमी को उसमें अपने पड़ोसियों के जीवन की झलकियाँ दिखीं. उनका खुशहाल जीवन देखकर वह ईर्ष्या और क्रोध से भर गया.

“ये लोग इतने अच्छे जीवन के हक़दार नहीं हैं” – उसने कहा, और कलम लेकर उनके भावी जीवन में भरपूर पीड़ा और कष्ट भर दिया. अंत में वह अपने जीवन के पन्नों तक भी पहुंचा. उसे अपनी मौत अगले ही पल आती दिखी. इससे पहले कि वह अपने जीवन में कोई फेरबदल कर पाता, मौत ने उसे अपने आगोश में ले लिया.
अपने जीवन के पन्नों तक पहुँचते-पहुँचते उसे मिले पांच मिनट पूरे हो चुके थे…वह दुसरो का बुरा सोचने के चक्कर में अपनी मौत के बारे में भूल गया और अपने पड़ोसियों के जीवन बद्दतर करने में अपने जीवन बचाने का मौका गवा दिया।

मंत्र : दुसरो के सुखो से ईर्ष्या करके अपना अनमोल जीवन नष्ट ना करे…

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