Home साहित्य कहानी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन के प्रेरक प्रसंग: #5 स्वदेशी से प्रेम

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन के प्रेरक प्रसंग: #5 स्वदेशी से प्रेम

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का स्वदेशी वस्तु के प्रयोग करने का आग्रह बड़ा प्रबल था. एक बार नागपुर में मैं शेविंग कर रहा था. मैं अपने काम में व्यस्त था कि अचानक किसी ने आकर मेरा शेविंग सोप ठाकर खिड़की से बाहर फेंक दिया. मैं समझा किसी ने मेरे साथ मजाक किया है. जरा गुस्से से मैंने नजर उठाकर देखा तो पंडित जी खड़े थे, मैं हैरान हो गया.

मैंने मन ही मन सोचा, पंडित जी तो कभी मजाक नहीं करते फिर आज साबुन क्यों फेंक दिया?

पंडित जी ने स्वयं ही कहना प्रारंभ किया-

भाई नाराज ना होना हम लोग स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करने के लिए अपने स्वयं सेवकों को उपदेश देते हैं किंतु अगर हम स्वयं उसका आचरण नहीं करेंगे तो हमारी बात का प्रभाव ही नहीं पड़ेगा यह साबुन विदेशी कंपनी का बना हुआ है देसी साबुन जब मिल सकता है तब विदेशी कंपनी का बना हुआ माल क्यों व्यवहार करते हो.

पंडित जी की बात सुनकर मुझे अपनी गलती का ज्ञान हो गया. इस प्रकार वे स्वदेशी वस्तु के प्रयोग के लिए विशेष रुप से आग्रहशील रहते थे.

-स्वर्गीय बाबू राव पालदी कर उड़ीसा

No comments

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version