पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन के प्रेरक प्रसंग: #4 खोटा सिक्का

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आगरा में विद्या अध्ययन काल में पंडित जी नानाजी देशमुख के साथ एक कमरे में रहते थे. एक दिन की बात है कि प्रातः दोनों लोग सब्जी लेने बाजार गए. सब्जी लेकर लौट रहे थे कि दीनदयाल जी बोले, “नाना बड़ी गड़बड़ हो गयी है.”

नाना जी ने गड़बड़ का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मेरे जेब में चार पैसे थे एक पैसा खोटा सिक्का था इस समय मेरे पास दो पैसे बचे हैं और दोनों अच्छे हैं… लगता है खोटा पैसा सब्जी वाली बुढ़िया के पास चला गया. चलो वापस चलें. वे वापस सब्जीवाली के पास गए और वास्तविकता बयान की तो उसने कहा कि जो हुआ सो हुआ अब तुम्हारा खोता पैसा कौन ढूंढे… जाओ कोई बात नहीं.

पर दीनदयाल जी नहीं माने और खोटा पैसा ढूंढ निकाला और उसे बदलकर बुढ़िया को सही पैसा दिया. बुढ़िया ने नम आंखों से कहा कि बेटा तुम कितने अच्छे हो भगवान तुम्हारा भला करे. अब दीनदयाल जी के मुख मंडल पर आत्मसंतोष का भाव था.

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