जानिए क्यों कुरुक्षेत्र युद्ध के एक भी योद्धा का शव नहीं मिला आज तक

496
जानिए क्यों कुरुक्षेत्र युद्ध के एक भी योद्धा का शव नहीं मिला आज तक

हम सभी ने महाभारत पढ़ी या दूरदर्शन पर जरूर देखी है दुनिया का सबसे बड़ा युद्ध ‘महाभारत’ कुरुक्षेत्र की भूमि पर द्वापर युग में हुआ है और इस युद्ध में पांडव पुत्रों ने धृत्‍राष्‍ट्र के सौ पुत्रों पर विजय हासिल की थी। इस महासंग्राम से कई तरह के रहस्‍य और कथाएं जुड़ी हुई हैं। जिनके बारे में वैज्ञानिक और अध्‍ययनकर्ता आज भी पता नहीं लगा पाए हैं।

जानिए क्यों कुरुक्षेत्र युद्ध के एक भी योद्धा का शव नहीं मिला आज तक

कहते हैं कि इस युद्ध में लाखों-करोड़ों शूरवीरों का रक्‍त बहा था और इसीलिए कुरुक्षेत्र की मिट्टी का रंग आज भी लाल है। लेकिन इसके साथ सवाल ये उठता है कि अगर वाकई ये सब सच है तो उन शवों का क्या हुआ… जिन लोगों ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने प्राण गवाए थे उनके शवों का अंतिम संस्कार कैसे हुआ…? अगर अंतिम संस्कार नही हुआ तो नर कंकाल या किसी भी तरह का कोई अवशेष क्यो नही मिला.. जबकि उससे पूर्व सतयुग युग में श्रीराम द्वारा बनाए गए रामसेतु का प्रमाण वैज्ञानको ने खोज निकाला। वाकई ये सोचनीय बात है और आज हम कुरुक्षेत्र की भूमि के इस रहस्‍य के के बारे में बता रहे हैं।

महाभारत के युद्ध में कितने योद्धा मारे गए थे?

महाभारत के युद्ध में कितने योद्धा मारे गए थे?

महाभारत के स्त्री पर्व के एक प्रसंग में धृतराष्ट्र युधिष्ठिर से युद्ध में मारे गए योद्धाओं की संख्या पूछते हैं, तब युधिष्ठर कहते हैं कि इस युद्ध में 1 करोड़ 66 लाख 20 हजार वीर मारे गए हैं। इनके अलावा 24 हजार 165 वीरों का पता नहीं है। युधिष्ठिर बताते हैं कि जो वीर क्षत्रिय धर्म निभाते हुए मारे गए हैं, वे ब्रह्मलोक में गए हैं। जो युद्ध से भागते हुए मारे गए हैं, वे यक्षलोक में गए हैं। जो वीर ईमानदारी से लड़ते हुए मारे गए हैं, वे अन्य पुण्यलोकों में गए हैं। जब धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से पूछा कि तुम्हारे पास ऐसी कौन सी शक्ति है, जिससे तुम ये सब बातें जानते हो, तो युधिष्ठिर ने बताया कि वनवास के दौरान देवर्षि लोमश ने मुझे जो दिव्य दृष्टि दी थी, उसी की सहायता से यह गुप्त बातें मुझे पता चली हैं।

क्या हुआ मृत योद्धाओं के शरीरों का

क्या हुआ मृत योद्धाओं के शरीरों का

महाभारत का युद्ध 18 दिनो तक चला था और माना जाता है कि महाभारत युद्ध में लाखों सैनिक मारे गए थे किन्तु उनका शव या अवशेष आज तक नहीं मिला दरअसल कुरुक्षेत्र में मारे गए योद्धाओं के शव इसलिए नहीं मिल पाए क्‍योंकि उस युग में मृत शवों के साथ भी दुर्व्‍यवहार नहीं किया जाता था। महाभारत के युद्ध में एक नियम का पालन किया जाता था कि दिन ढलने के बाद ही युद्ध को रोक दिया जाता था और जिन लोगों के शव भूमि पर पड़े होते थे उन्‍हें उनके परिवार को सौंप दिया जाता था। इन शवों के अंतिम संस्‍कार के बाद सिर्फ राख ही बचती थी।

पितामह भीष्‍म

किवदंती है कि जिस दिन पितामह भीष्‍म ने अंतिम सांस ली थी उस दिन कुरुक्षेत्र की भूमि को जला दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि युद्ध में मारे गए हर योद्धा केा स्‍वर्ग में जगह मिल सके और उनके शवों का शुद्धिकरण हो जाए और इस तरह इस युद्ध के सारे साक्ष्य हमेशा के लिए खत्म हो गए। वैसे महाभारत के युद्ध में बहुत कुछ हुआ था जिस पर विश्वास करना कठिन है। शायद यही वजह है कि आज भी बहुत से लोग इसे सच नहीं समझते हैं, किन्तु ऐसे नहीं कई साक्ष्य देखने एवं सुनने में अक्सर आते रहते है जिससे हमारी भावना और मजबूत होती है।

इसी तरह के अन्य रोचक तथ्यों को पढ़ने के लिए और हमसे जुड़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को जरूर लाइक करें

Leave a Reply