Home साहित्य कहानी कहानी: आप हाथी नहीं इंसान हो…

कहानी: आप हाथी नहीं इंसान हो…

एक बार राजा कृष्णदेवराय अपने कुछ दरबारियों के साथ एक गांव से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा, और अपना काफिला अचानक रुकवा दिया. उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है, कृष्णदेव को इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं ये स्पष्ठ था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे, पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे.

उसने पास खड़े तेनालीरामन से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं ?


तब तेनालीरामन ने कहा, ” महाराज इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है, उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें. बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते,और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते.”

कृष्णदेवराय आश्चर्य में पड़ गए तब तेनालीरामन ने कहा “महाराज ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं वो रस्सी नहीं तोड़ सकते ठीक इसी तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े-जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं.”

महाराज कृष्णदेवराय तेनालीरामन की सूझबूझ से भोत प्रसन्न हुए और उन्हें यथोचित पुरुस्कार दिया

मन्त्र: याद रखिये असफलता जीवन का एक हिस्सा है ,और निरंतर प्रयास करने से ही सफलता मिलती है. यदि आप भी ऐसे किसी बंधन में बंधें हैं जो आपको अपने सपने सच करने से रोक रहा है तो उसे तोड़ डालिए…

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