भोजन मंत्र – Bhojan Mantra

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Bhojan Mantra nd rules in hindi

हम सभी को भोजन की जरुरत होती है | यह हमारे शरीर को ऊर्जा देता है और जीवन के लिए अति आवश्यक है | भोजन करते समय हमे कुछ नियमो और बातो का विशेष ध्यान रखना चाहिए | यह नियम आध्याम्तिक और वैज्ञानिक दोनों रूप में सही होती है | भोजन करते समय पौष्टिक आहार काम में ले क्योकि माना जाता है जैसा खाओगे अन्न , वैसा रहेगा मन

आइये जाने है भोजन से पूर्व कहे जने वाले मंत्रो एवं नियमो के बारें में…


भोजन मंत्र – Bhojan Mantra



अन्न ग्रहण करने से पहले
विचार मन मे करना है
किस हेतु से इस शरीर का
रक्षण पोषण करना है

हे परमेश्वर एक प्रार्थना
नित्य तुम्हारे चरणो में
लग जाये तन मन धन मेरा
विश्व धर्म की सेवा में ॥

ॐ ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम् ।
ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥

ॐ सह नाववतु ।
सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्विनावधीतमस्तु ।
मा विद्‌विषावहै ॥

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥


सरलार्थ:


ॐ ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम् ।
ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥

जिन वस्तुओं को हम खुद को खिलाने के लिए उपयोग करते हैं वे ब्रह्मा हैं। भोजन ही ब्रह्मा है। भूख की आग में हम ब्रह्मा महसूस करते हैं। हम ब्रह्मा हैं और भोजन खाने और पचाने की प्रक्रिया ब्रह्मा की क्रिया है। अंत में, हम प्राप्त परिणाम ब्रह्मा है। – भगवद गीता

ॐ सह नाववतु ।
सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्विनावधीतमस्तु ।
मा विद्‌विषावहै ॥

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥

आइए हम एक-दूसरे की रक्षा करें। चलो एक साथ खाते हैं। चलो एक साथ काम करते हैं। आइए उज्ज्वल और सफल होने के लिए एक साथ अध्ययन करें। हमें एक दूसरे से नफरत नहीं करते हैं।
ॐ शांति: शांति: शांति:


भोजन से जुड़े नियम


  • भोजन करते समय आपका मुख्य पूर्व दिशा में होना चाहिए
  • भोजन करने से पूर्व दोनों हाथो , पैरो और मुख को जल से धोकर ही भोजन करे |
  • यदि परिवार एक साथ भोजन करेगा तो आपस में प्यार , सम्मान और एकता अधिक बढेगी |
  • खड़े खड़े और जूते पहन कर कभी भोजन ना करे |
  • भोजन कैसा भी हो देवता के तुल्य है अत: कभी भोजन की बुराई ना करे |
  • भोजन हमेशा जमीन पर बैठ कर ही करे , यह भोजन करने की सबसे उत्तम जगह मानी गयी है |
  • भोजन हमेशा प्रसन्न भाव से और शांति से करना चाहिए | चिंता और दुखी होकर किया गया भोजन शरीर को नही लगता है |
  • भोजन उतना ही ले जितनी भूख हो | कभी भोजन को झूठा नही छोड़े वरना लक्ष्मी नाराज हो जाती है |

    भोजन करने के बाद पढ़े यह मंत्र


    अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।
    यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।


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