मस्तक नहीं झुकने दूंगा

1267
maut se than gyi - atal bihari vajpayee poem mp3 download

मस्तक नहीं झुकने दूंगा – Atal Bihari Vajpayee Poem mp3 download


मस्तक नहीं झुकने दूंगा

एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते
पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।
अगणित बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता
त्याग, तेज, तप, बल से ‍रक्षित यह स्वतंत्रता
प्राणों से भी प्रियतर यह स्वतंत्रता।

इसे मिटाने की साजिश करने वालों से
कह दो चिनगारी का खेल बुरा होता है
औरों के घर आग लगाने का जो सपना
वह अपने ही घर में सदा खरा होता है।

अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र न खोदो
अपने पैरों आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ
ओ नादान पड़ोसी अपनी आंखें खोलो
आजादी अनमोल न इसका मोल लगाओ।

पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है
तुम्हें मुफ्‍त में मिली न कीमत गई चुकाई
अंगरेजों के बल पर दो टुकड़े पाए हैं
मां को खंडित करते तुमको लाज न आई।

अमेरिकी शस्त्रों से अपनी आजादी को
दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो
दस-बीस अरब डॉलर लेकर आने वाली
बरबादी से तुम बच लोगे, यह मत समझो।

धमकी, जेहाद के नारों से, हथियारों से
कश्मीर कभी हथिया लोगे, यह मत समझो
हमलों से, अत्याचारों से, संहारों से
भारत का भाल झुका लोगे, यह मत समझो।
जब तक गंगा की धार, सिंधु में ज्वार
अग्नि में जलन, सूर्य में तपन शेष
स्वातंत्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे
अगणित जीवन, यौवन अशेष।

अमेरिका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध
कश्मीर पर भारत का ध्वज नहीं झुकेगा,
एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते
पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।


अटल जी की अमर कविताएँ

–> अटल बिहारी वाजपेयी: काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं.. गीत नया गाता हूं’

–> पंद्रह अगस्त का दिन कहता – आज़ादी अभी अधूरी है।

–> दूध में दरार पड़ गई.

मित्रों आपको यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके अवश्य बताएं. और हमसे जुड़े रहने के लिए हमारे फेसबुक पेज को जरूर लाइक करें जय हिन्द

2 Comments

Leave a Reply