मातृ मंदिर का समर्पित दीप मै – Matru Mandir Ka samarpit Deep Main with Lyrics

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Matru Mandir Ka samarpit Deep Main

मातृ मंदिर का समर्पित दीप मै – Matru Mandir Ka samarpit Deep Main with Lyrics


मातृ-मंदिर का समर्पित दीप मै

मातृ-मंदिर का समर्पित दीप मै
चाह मेरी यह की मै जलता रहूँ ॥धृ॥

कर्म पथ पर मुस्कराऊँ सर्वदा
आपदाओं को समझ वरदान मैं
जग सुने झूमे सदा अनुराग मे
उल्लसित हो नित्य गाऊँ गान मैं
चीर तम-दल अज्ञता निज तेज से
बन अजय निश्शंक मै चलता रहूँ ॥१॥

सुमन बनकर सज उठे जयमाल में
राह में जितने मिले वे शूल भी
धन्य यदि मै जिन्दगी की राह में
कर सके अभिषेक मेरा धूल भी
क्योंकि मेरी देह मिट्टि से बनी है
क्यों न उसके प्रेम में पलता रहूं ॥२॥

मै जलूँ इतना कि सारे विश्व में
प्रेम का पावन अमर प्रकाश हो
मेदिनी यह मोद से विहँसे मधुर
गर्व से उत्फुल्ल वह आकाश हो
प्यार का संदेश दे अन्तिम किरण
मैं भले अपनत्व को छलता रहूं ॥३॥

मातृ-मन्दिर का अकिंचन दीप मै
चाह मेरी यह कि मै जलता रहूं

संघ गीत:

–> विश्व में गूँजे हमारी भारती

–> विश्व गुरु तव अर्चना मे

–> राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ(RSS) प्रार्थना


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1 Comment

  1. बहुत ही अच्छा गीत है।

    विवेक सर मेने भी एक ब्लॉग बनाया है जिस पर में आपके जैसे पोस्ट लिखता हूँ please एक बार विजिट करे (www.nuswami.com)

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