Kargil Vijay Diwas | कारगिल विजय के 20 साल पुरे होने पर कारगिल युद्ध की विशेष बातें

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Kargil Vijay Diwas | कारगिल विजय के 20 साल पुरे होने पर कारगिल युद्ध की विशेष बातें

26 जुलाई 1999, भारतीय इतिहास का वो गौरवान्वित दिन जिसे इतिहास के पन्नो में सुनहरे अक्षरों में कारगिल विजय दिवस के नाम से लिखा गया है और हर साल इस दिन हम अपने वीर सपूतों को श्रधांजलि अर्पित करते है | ये वही दिन है जिस दिन कारगिल युद्ध का अंत करते हुए और पाकिस्तानी सेना पर अपना जीत का परचम लहराते हुए भारतीय सेना के वीर सपूतों ने पाकिस्तान की सेना के हर नापाक इरादे को मिटटी में मिला दिया और उन्हें हमारे देश की सीमा से बाहर खदेड़ दिया था।

आज कारगिल युद्ध के 20 साल पुरे हो गए है। और आज सुबह से ही पुरे भारतवर्ष में कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए वीरों को श्रधांजलि देने का कार्यक्रम चल रहा है। इसी क्रम में हमारे माननीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद वीरो को श्रधांजलि देने दिल्ली के वार मेमोरियल पहुंचे और फिर श्रीनगर भी गए और वहां भी वीरों को श्रधांजलि अर्पित की। दरसल राष्ट्रपति को द्रास भी जाना था पर ख़राब मौसम के कारन उनका ये कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। राष्ट्रपति के साथ-साथ कई बड़े दिग्गज नेता भी वार मेमोरियल में वीरों को श्रधांजलि अर्पित करने पहुंचे। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भी विडियो मेसेज के ज़रिये वीरों को श्रधांजलि अर्पित की।

आइये जानते है कैसे शुरू हुआ कारगिल युद्ध ?

1997 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और उस समय के पाकिस्तान सेना के प्रमुख जहाँगीर करामत के बीच मतभेद बढ़ गए और अपने ऊपर किये गए टिपण्णी से खफा होकर करामत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नवाज ने परवेज़ मुशर्रफ़ को सेना पर्मुख नियुक्त किया और भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की तैयारी की गयी।

3 मई 1999 को भारतीय सेना को एक चरवाहे द्वारा जानकारी मिली की पाकिस्तानी सेना कारगिल की ऊँची पहाड़ियों से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है। जानकारी प्राप्त होने के बाद जब भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम जानकारी लेने कारगिल पहुँची तो पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया और उनमें से 5 की हत्या कर दी और पाकिस्तान की गोलाबारी में से भारतीय सेना का कारगिल में मौजूद गोला बारूद का स्टोर भी नष्ट हो गया। 10 मई को पहली बार लदाख के प्रवेश द्वार यानी द्रास, काकसार और मुश्कोह सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा गया | इसके बाद 26 मई को भारतीय सेना को कार्यवाही के आदेश दिए गए। और भारतीय वायुसेना ने 27 मई पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया और फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को बंदी बना लिया | कारगिल का ये युद्ध पुरे 2 महीने तक चला और भारतीय सेना के वीर जवानों ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर पाकिस्तान के घुसपैठियों को उनके इरादों में विफल किया और देश की सीमा से बाहर निकाल फेंका।

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भारतीय सेना ने अपने साहस और बल के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना पर हथियारोंका भी भरपूर प्रयोग किया | सेना के अनुसार इस युद्ध में दुश्मन की सेना पर लगभग दो लाख पचास हजार गोले दागे गए वहीँ 5000 बम भी दागे गए जिसके लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेटों का इस्तेमाल किया गया। सूत्रों के मुताबिक द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसी युद्ध में दुश्मन देश पर सबसे ज्यादा हथियारों का प्रयोग किया गया।

इस युद्ध में विजय प्राप्त होने के बाद एक तरफ जहाँ भारत में देश प्रेम अपनी चरम सीमा पर था और साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था को काफ़ी मजबूती भी मिली वहीँ दूसरी तरफ मुह के बल गिरे हुए पाकिस्तान को युद्ध में हार का स्वाद तो चखना हो पड़ा साथ ही पाकिस्तान में राजनैतिक और आर्थिक अस्थिरता भी बढ़ गई।

आज कारगिल युद्ध के 20 साल बाद भी हमारी सेना किसी भी तरह के युद्ध के लिए पूरी तरह सक्षम है। बता दे पूरी दुनिया में हमारे देश की सेना तीसरी सबसे बड़ी सेना है और हर तरह के हथियार और तकनीक से पूरी तरह लैस है।

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